में फिर आउंगी – Horror Story Hindi

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राजीव , ”देखो नवीन !  में एक बार फिर कह रहा हूँ की वह लड़की कल रात मेरे साथ थी, हम दोनों ने इकट्ठे खाना भी खाया था l”

नवीन, ”बस करो, बस करो l बहुत हो गया l ज्यादा लम्बी-लम्बी मत हांका करो, दिन में सपने देखना छोड़ दो वह कोई हवा तो नहीं थी जो उड़ गई ?..

राजीव, ”हवा भी हो सकती है,

नवीन, ”मगर वह हवा थी कौन?..

राजीव, ”में आपसे यही तो पूंछ रहा हूँ, की वो कौन थी?.. जो रात आपके जन्मदिन की पार्टी में आपके साथ नाच रही थी?.. उसे देखकर मुझे ऐसा लगा जैसे आकाश से कोई परी उतर आई हो, जिसकी  सुन्दरता को देखकर देवताओं के भी मन डोल जाएँ, ऐसी सुन्दरता मैंने आज से पहले कभी नहीं देखी.

नवीन, ”अब तुम उसकी सुन्दरता का  बखान करना बंद करो और उसका नाम बताओ?..

राजीव, ”उसका नाम चांदनी है.

नवीन, ”मेरे दोस्त राजीव मेरी पार्टी में चांदनी नाम की कोई लड़की नहीं आई थी, और ना ही मैं इस नाम की किसी भी लड़की को जानता हूँ.

राजीव, ”हां मैं समझ गया आप उस सुंदर लड़की के बारे में मुझे बताना नहीं चाहते, खैर छोडिये आप बताएं या ना बताएं में उसे ढूंढ कर ही रहूंगा.

नवीन, ” राजीव तुम बिलकुल गलत सोच रहे हो, ऐसी कोई बात नहीं है जब में चांदनी नाम की ऐसी किसी लड़की को जानता ही नहीं तो तुम्हे क्या बताऊँ?.. ना जाने तुमने कौनसी लड़की देखली जिसके लिए तुम पागल हुए जा रहे हो.

राजीव, ”हाँ में पागल हो गया हूँ, जबसे उस लड़की को देखा है, मुझे एक पल के लिए भी चैन नहीं है, जहाँ देखता हूँ वही नजर आती है, अब आप ही बताइए में क्या करूँ मुझे बस एक बार उससे मिलना है.

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नवीन, ”मुझे तो लग रहा है ये तुम्हारा कोई वहम है, तुमने कहा था की वो लड़की पार्टी में मेरे साथ डांस कर रही थी, अगर कोई लड़की मेरे साथ डांस करती तो क्या मुझे दिखाई नहीं देती?..

राजीव, ”वहम और मेरा नहीं ये नहीं हो सकता ,जब में उस लड़की को ढूँढकर आपके सामने लाकर खडी कर दूंगा तब तो आप मानेंगे.

नवीन, ”अरे यार राजीव तुमने क्या लड़की..लड़की की रट लगा रखी है, अगर कोई लड़की थी भी तो वह रात में आई और रात ही की तरह गायब हो गई, अब उसके पीछे मत भागो भूल जाओ उसे, ना जाने कौन थी वो, कहाँ से आई थी, जो एक रात में ही तुम्हे पागल कर गई.

 

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राजीव, ”में उसे चाह कर भी नहीं भूल सकता, में उसे हर जगह तलाश करूंगा कहीं तो मिलेगी.

काफी दिन बीत गये नवीन और राजीव की मुलाक़ात अब बहुत दिनों से नहीं हुई थी,क्यूंकि ना जाने कितने ही महीनों से राजीव चांदनी की तलाश में पागलों की तरह यहाँ से वहाँ भटक रहा था.

लेकिन चांदनी का अभी तक कोई अता-पता नहीं  था, और पता चलता भी कैसे राजीव के पास ना उसका कोई एड्रेस था, ना ही वह चांदनी के किसी दोस्त से मिला था.

एक रात की बात है राजीव पैदल अपने घर जा रहा था, मन में चांदनी के बारे में ही सोच रहा था, उसकी उस खूबसूरती के बारे में जिसको एक बार देखने पर ही राजीव पागल हो गया था.

अभी वह चांदनी के ख्यालों में खोया ही हुआ था की, उसे कोई आवाज सुनाई देने लगी, वह और ध्यान लगाकर उस आवाज को सुनने लगा जिस ओर से वह आवाज आ रही थी, उस ओर कब्रिस्तान थे .

कुत्ते उस आवाज को सुनकर बेतहाशा भोंके जा रहे थे, राजीव कभी कुत्तों की ओर देखता तो कभी कब्रिस्तान की ओर जहाँ से वो डरावनी आवाजें आ रही थीं, राजीव उन आवाजों को और नजदीक से सुनने के इरादे से कुछ डरा कुछ सहमा सा धीरे -धीरे कब्रिस्तान की तरफ बढ़ने लगा.

वह करीब 20 मीटर की दुरी पर पहुंचा था की उसने कब्रिस्तान में कुछ ऐसा दृश्य देखा जिससे की उसकी दिल की धड़कन तेज हो गई और वह पसीने-पसीने हो गया.

 

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उसने देखा की कब्रिस्तान में कब्र के अंदर से कोई बाहर निकल रहा है, जैसे ही उसने वह दृश्य देखा वह वहाँ से भागा, करीब 150-200 मीटर की दूरी पर बस स्टॉप था वहाँ आकर उसने साँस ली.

राजीव खुद से ही बातें करने लगा, ”बाप रे यह क्या था जो अभी मैंने देखा ऐसा कभी हो सकता है क्या, कोई मुर्दा कब्र से बाहर कैसे आ सकता है?.. कितना भयानक दृश्य था वह, और अगर वह मुर्दा मुझे देख लेता तो यह कहते हुए राजीव की साँसे जैसे 5-10 सेकेंड के लिए थम सी गईं थी.

बस स्टॉप में वो अन्दर जाकर बैठ गया ना जाने कब-कब में उसकी आँख लग गई, आँख खुली तो उसने देखा की उसके सामने चांदनी बैठी है, और उसकी ऑंखें बंद हैं.

वह धीरे से उसके पास गया और उसके कान के पास फुसफुसाया, ”में ना जाने तुम्हे कब से ढून्ढ रहा था, आज मेरी तलाश खत्म हो गई, चांदनी ने यह सुनकर अपनी आँखें खोलीं और कहा, कौन हो तुम और मुझे क्यूँ ढूंढ रहे थे?

क्या में तुम्हे जानती हूँ ?..

 

राजीव, नहीं तुम मुझे नहीं जानती लेकिन में तुम्हे अच्छे से जानता हूँ, या यूँ कह लो जिस दिन से मैंने तुम्हे देखा है उस दिन से में तुमसे मिलने के लिए बेचैन हूँ, तुम्हारी खूबसूरती को निहारने के लिए में मरा जा रहा था.

चांदनी, !ओह अच्छा तो यह बात है.

राजीव, हाँ यही बात है.

चांदनी, तो तुम मेरे साथ हमबिस्तर होना चाहते हो?.. मैंने सही कहा ना?..

राजीव, तुमने तो एक बार में ही मेरे मन की बात जान ली, तुम्हे कैसे पता की में यही चाहता हूँ.

चांदनी, हा हा हा… मुझे सब पता है लड़के लड़कियों से क्या चाहते हैं.

राजीव, अच्छा सब पता है?.. लगता है आग दोनों तरफ बराबर लगी है, क्या तुम भी वही चाहती हो जो में चाहता हूँ?

चांदनी, और कितनी लड़कियों को तुम यह बात कह चुके हो.

राजीव, तुम पहली हो आज से पहले मैंने यह बात किसी और से नहीं कही.

तब चांदनी ने भारी आवाज में कहा, झूठ, तुम झूठ बोल रहे हो मुझसे पहले ना जाने तुम कितनी लड़कियों को यह बात बोल चुके हो…जैसे ही चांदनी ने यह बात कही उसकी ऑंखें लाल हो गयीं, और चेहरा इतना डरावना की मानो, राजीव के प्राण लेने स्वयं यमराज धरती पर आ गये हों, और अपने लम्बे-लम्बे नाखूनों से उसने एक बार में ही राजीव का सर धड से अलग कर दिया.

और वह कह रही थी, औरत को बस भोग विलास की वस्तु समझने वाले इंसानों का यही हाल होना चाहिए, अब से कोई भी इंसान किसी औरत या लड़की को सिर्फ एक वस्तु की तरह देखेगा तो में उसको नहीं छोडूंगी, में फिर आउंगी हा हा हा हा…

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